देवनागरी को भारत की राष्ट्रीय लिपी कहा जाता है. भारत की कई प्रमुख भाषायें इसी ’रस्मुलख़त’ में लिखी जाती है. जिस में भारतीय भाषाओं की जननी संस्कृत, तथा हिंदी, मराठी, नेपाली, कोंकणी आदि राष्ट्रीय भाषाएं भी शामील है. मतलब भारत की अधिकतम जनता इसी लिपी का प्रयोग अपनी भाषा लिखने के लिए करती हैं |

देवनागरी में ’ह’ के बाद आनेवाला व्यंजन है, ’ळ’. इस अक्षर का प्रयोग आज हिंदी ज़बान में नहीं किया जाता. देवनागरी लिपी इस्तेमाल करने के बावजूद ’ळ’ का प्रयोग हिंदी में क्युं नहीं किया जाता, ये सवाल आज भी मेरे मन में है. अगर संस्कृत की बात की जाए तो, ’ळ’ का प्रयोग केवल वेदों, उपनिषदों तथा पुरानों तक ही सिमित रखा गया है, ऐसा ही मालूम पडता है. वेदों के कई श्लोकों में ’ळ’ का उपयोग दिखाई पड़ता हैं. बोलचाल की संस्कृत में ’ळ’ को शायद निषिद्ध की माना गया है. मराठी तथा सभी जुनुबी हिंद (दक्षिण भारत) की ज़ुबानों की बात की जाए तो यह सभी भाषाएं ’ळ’ का उपयोग अपनी बोलचाल में करती है. यह माना जाता है की, संस्कृत ही सभी भारतीय ज़ुबानों की माता है. इसी वजह से संस्कृत के सभी अल्फाज़ तथा तलफ्फ़ुज़ (उच्चारण) भारत की भाषाओं में मौजुद है. लेकिन शायद ’ळ’ के बारें में यह नियम कतई लागू नहीं होता. हम हिंदी में ’तमिल’ और ’मल्यालम’ कहते है. असल में यह अल्फ़ाज़ वहां की ज़ुबानों में ’तमिळ’ और ’मल्याळम’ है. इस्तेमाल किए जानेवाले अक्षर भले ही अलग हो लेकिन उसका उच्चारण तो ’ळ’ ही होता है. अंग्रेजी में मराठी, कन्नड तथा तेलुगू भाषाओं के लिए यह लब्ज़ L (एल) तथा तमिळ और मल्याळम भाषाओं के लिए zh (ज़ेड़ एच) से दर्शाया जाता है. ’एल’ को हिंदी उच्चारण ’ल’ तथा ’ज़ेड़एच’ का हिंदी उच्चारण ’झ’ के किया जाता है. इसी कारणवश मूल अल्फ़ाज के तलफ़्फ़ुज़ हम कर नहीं पातें |
हाल ही का उदाहरण लिया जाए तो ’kanimozhi’ इस शब्द का उच्चारण हम ’कनिमोझी’ करते है. लेकिन यह बिल्कुल ग़लत हैं. इसे असल में ’कनिमोळी’ पढ़ा जाना चाहिए. मल्याळम में आए ’manichithratazhu’ नामक सिनेमा को हम हिंदीवाले ’मनिचित्रताझु’ से पढ़ते है. असल मे इसका उच्चारण ’मनिचित्रताळ’ है. मराठी भाषा की बात की जाए तो ’ण’ के अलावा ’ळ’ ही ऐसा एक लब्ज़ है, जो किसी भी शब्द के शुरुआत में नहीं आता. इसे किसी शब्द के बीच में या अंत में इस्तेमाल किया जाता है. जैसे के- नेपाळ, वाळवंट, पोळी आदि. मराठी भाषा में किए ’ळ’ के उच्चारण को हिंदी में ’ल’ से बोला जाता है. दोनों ज़ुबानों की एकही देवनागरी लिपी होने के बावजूद एक अक्षर को दूसरे अक्षर में परावर्तित करने का ये पहला की मौका होगा! उदाहरण के तौर पर मराठी के ’काळे’ को हिंदी में ’काले’, ’टिळक’ को ’टिलक’, तथा ’कळवण’ को कलवण कहां जाता है |
हिंदी में केवल एक लब्ज़ ना इस्तेमाल किए जाने की वजह से इतने सारे शब्दों के उच्चारण हम भारतीय ग़लत तरिके से करते है. हमे अगर अपनी ज़बान और सुधारनी है तो इस बात को भी सुधारने की भी जरूरत है. ’ळ’ का प्रयोग अगर हिंदी में करना शुरू किया जाए तो शायद इस जुबान की अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं में होने वाली दूरी और कम हो सकती है |
‘ळ’ का शब्दप्रयोग
हिंदी भाषा में ‘ळ’ एक विशेष व्यंजन अक्षर है, जिसका प्रयोग सामान्य हिंदी शब्दों में बहुत कम देखने को मिलता है। यह अक्षर मुख्य रूप से संस्कृत, मराठी, कोंकणी तथा कुछ क्षेत्रीय भाषाओं से आए शब्दों में उपयोग किया जाता है। हिंदी वर्णमाला में ‘ळ’ को मूर्धन्य व्यंजन माना जाता है और इसका उच्चारण जीभ को मोड़कर किया जाता है।
इस लेख में हम ‘ळ’ के शब्दप्रयोग, उच्चारण, महत्व और उदाहरणों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
‘ळ’ क्या है?
‘ळ’ हिंदी का एक विशेष व्यंजन अक्षर है। इसका उच्चारण सामान्य ‘ल’ से अलग होता है।
उच्चारण की विशेषता
- ‘ल’ का उच्चारण सामान्य रूप से होता है।
- ‘ळ’ का उच्चारण जीभ को ऊपर मोड़कर किया जाता है।
भाषाविज्ञान में इसे “मूर्धन्य ल” कहा जाता है।
हिंदी में ‘ळ’ का महत्व
हालांकि आधुनिक हिंदी में ‘ळ’ का उपयोग सीमित है, लेकिन कई शब्दों और नामों में इसका प्रयोग महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेष रूप से:
- संस्कृत मूल के शब्द
- मराठी और क्षेत्रीय भाषाओं के शब्द
- पारंपरिक नाम
- धार्मिक और सांस्कृतिक शब्द
में इसका उपयोग देखने को मिलता है।
‘ळ’ वाले शब्दों के उदाहरण
नीचे कुछ सामान्य शब्द दिए गए हैं जिनमें ‘ळ’ का प्रयोग होता है:
| शब्द |
अर्थ |
| झळक |
चमकना |
| काजळ |
आंखों में लगाया जाने वाला काजल |
| बाळ |
बच्चा (मराठी प्रभाव) |
| मळा |
खेत या बगीचा |
| जाळ |
जाल या आग की लपट |
| पिळ |
दबाव या मोड़ |
संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं में ‘ळ’
Sanskrit और Marathi जैसी भाषाओं में ‘ळ’ का प्रयोग अधिक देखा जाता है।
विशेषकर मराठी भाषा में यह अक्षर काफी सामान्य है।
उदाहरण
हिंदी व्याकरण में ‘ळ’
आधुनिक मानक हिंदी में ‘ळ’ का प्रयोग सीमित माना जाता है। अधिकांश हिंदी शब्दों में ‘ल’ का उपयोग किया जाता है, लेकिन क्षेत्रीय प्रभाव वाले शब्दों में ‘ळ’ आज भी प्रचलित है।
‘ल’ और ‘ळ’ में अंतर
| अक्षर |
उच्चारण |
उपयोग |
| ल |
सामान्य |
हिंदी में व्यापक |
| ळ |
जीभ मोड़कर |
संस्कृत/मराठी प्रभाव वाले शब्द |